लुधियाना-(राजकुमार )
पूर्व स्वास्थय मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता सतपाल गोंसाई ने लुधियाना की औद्योगिक इकाइयों पर रोजमर्रा की बिजली कटौती के चलते बर्बादी की तरफ रुख कर रही इंडस्ट्री की दुर्दशा के लिए राज्य सरकार की गल्त नितियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार उद्योगो को बचाने के लिए बिजली का प्रबंध नहीं कर सकती तो त्याग पत्र देकर अपनी नैतिक जिम्मेंदारी का परिचय दे। गोंसाई ने पंजाब सरकार की तरफ से राज्य में बिजली सरप्लस होने के झूठे दावों की पोल खोलते हुए कहा कि एक तरफ तो बिजली सरप्लस होने के बयान जारी करके वाहवाही लूटी जा रही हैंं। दूसरी तरफ औद्योगिक इकाइयों पर लंबे लंबे कट लगाकर उद्योगों को बर्बाद किया जा रहा है। जो कि राज्य सरकार की गल्त नितियों का मुंह बोलता सबूत है। उन्होने दो टूक शब्दों में राज्य सरकार से कहा कि अगर बिजली नहीं दे सकते तो त्यागपत्र देकर घर लौट जाओ। पंजाब में नशे की गर्त में धंसते जा रहे युवा वर्ग की तरस हालत के भी उन्होने सतासीन लोगो की नितियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि एक तरफ तो राज्य को नशामुक्त करने के लिए बड़ी बड़ी रैलियां करके नशा रहित समाज की सृजना का ढोंग रचा जा रहा है। दूसरी तरफ से नशा परोसने वालो को गोद में बैठा कर उनका पालन पोषण किया जा रहा है।
पूर्व स्वास्थय मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता सतपाल गोंसाई ने लुधियाना की औद्योगिक इकाइयों पर रोजमर्रा की बिजली कटौती के चलते बर्बादी की तरफ रुख कर रही इंडस्ट्री की दुर्दशा के लिए राज्य सरकार की गल्त नितियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार उद्योगो को बचाने के लिए बिजली का प्रबंध नहीं कर सकती तो त्याग पत्र देकर अपनी नैतिक जिम्मेंदारी का परिचय दे। गोंसाई ने पंजाब सरकार की तरफ से राज्य में बिजली सरप्लस होने के झूठे दावों की पोल खोलते हुए कहा कि एक तरफ तो बिजली सरप्लस होने के बयान जारी करके वाहवाही लूटी जा रही हैंं। दूसरी तरफ औद्योगिक इकाइयों पर लंबे लंबे कट लगाकर उद्योगों को बर्बाद किया जा रहा है। जो कि राज्य सरकार की गल्त नितियों का मुंह बोलता सबूत है। उन्होने दो टूक शब्दों में राज्य सरकार से कहा कि अगर बिजली नहीं दे सकते तो त्यागपत्र देकर घर लौट जाओ। पंजाब में नशे की गर्त में धंसते जा रहे युवा वर्ग की तरस हालत के भी उन्होने सतासीन लोगो की नितियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि एक तरफ तो राज्य को नशामुक्त करने के लिए बड़ी बड़ी रैलियां करके नशा रहित समाज की सृजना का ढोंग रचा जा रहा है। दूसरी तरफ से नशा परोसने वालो को गोद में बैठा कर उनका पालन पोषण किया जा रहा है।
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